परमानंद आश्रम का इतिहास

तीर्थराज प्रयाग में गंगा किनारे झूसी स्थित श्री परमानन्द आश्रम दशनाम सन्यास परंपरा का लगभग 250 वर्ष प्राचीन आश्रम है। यहाँ भगवान् श्री गंगेश्वर महादेव, वेणीमाधव, दुर्गा जी, श्री शारदेश्वर महादेव के भव्य मन्दिर मौजूद हैं।

यह आश्रम अपने स्थापना काल से ही संस्कृत, वेद, वेदान्त, भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन आदि के प्रचार-प्रसार में लगा है। वेदों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए वर्ष 1999 में ब्रह्मलीन श्री स्वामी शारदानन्द गिरि जी महाराज ने अपने गुरु के नाम पर श्री स्वामी नरोत्तमानन्द गिरि वेद विद्यालय की स्थापना की।

आश्रम का इतिहास

वर्तमान समय में संस्था के अध्यक्ष श्री स्वामी विद्याधीशानन्द गिरि जी महाराज हैं। संस्था के उपाध्यक्ष श्री स्वामी शरद पुरी जी महाराज के कुशल मार्गदर्शन में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से करीब 26 वर्षों से संचालित श्री स्वामी नरोत्तमानन्द गिरि वेद विद्यालय में वेद पढ़ने वाले छात्रों को ऋग्वेद, शुक्लयजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद के साथ-साथ बच्चों को संस्कृत, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विषय पढ़ाया जाता है ताकि उनमें सामाजिक भावना भी आए। संस्था की कोशिश है कि यहां पढ़ने वाले वेद छात्र अपनी प्राचीन परंपरा और आधुनिक परंपरा दोनों को सीख सकें, इसके लिए बच्चों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाता है और यहाँ बच्चे सिर्फ वेदों की पढ़ाई ही नहीं करते, बल्कि खेल-कूद, पेंटिंग, बागवानी व अन्य व्यावहारिक प्रशिक्षण भी लेते हैं। बच्चों को यहां क्रिकेट, कबड्डी, बैडमिंटन जैसे खेल भी खेलने को मिलता है। बच्चों को योग के जरिए ध्यान लगाने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। वेद पाठशाला में करीब 60 वेदपाठी छात्र वेदों का अध्ययन कर रहे हैं। ज्यादातर बच्चे उत्तर प्रदेश के ही हैं और इनमें से भी अधिकांश प्रयागराज के आस पास के जिलों से हैं। संस्कृत शिक्षा के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त गंगेश्वर संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय भी संचालित होता है। दोनों विद्यालय गुरुकुल परंपरा के आधार पर संचालित किए जाते हैं जहां छात्र अपने अध्ययन काल तक विद्यालय छात्रावास में रहते हैं। जहां इन्हें निःशुल्क भोजन, आवास, दैनिक उपयोग की सामग्री, किताबें, कॉपी, पेन, वस्त्र, शीतकालीन ऊनी वस्त्र आदि प्रदान किए जाते हैं। इस वेद पाठशाला में प्राचीन व आधुनिक शिक्षा के समान मिश्रण से देश की सर्वोत्तम पाठशाला और सर्वोत्तम वैदिक तैयार किये जाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। इस पाठशाला के छात्र लगातार राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान पर जीत हासिल करते रहे हैं। यहां से पढ़कर निकलने वाले वैदिक छात्र देश के नामी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेकर न केवल आगे की पढ़ाई करते हैं बल्कि कई वैदिक तो विभिन्न देशों में स्थित मंदिरों को संभालने, देश की विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में वेदाचार्य के रूप में सेवा देने का कार्य कर रहे हैं।

Gurukul Establishment

हमारा दृष्टिकोण एवं ध्येय (मूल्य एवं आदर्श)

दृष्टिकोण (Vision)

प्राचीन वैदिक ज्ञान-विज्ञान, सस्वर मौखिक परंपरा और सनातन जीवन मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन करते हुए आधुनिक तकनीक (AI/कंप्यूटर), विज्ञान और व्यावहारिक कौशल से युक्त ऐसे आदर्श व प्रबुद्ध वैदिक विद्वानों का निर्माण करना, जो 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'विश्वकल्याण' के भाव के साथ राष्ट्र व समाज का मार्गदर्शन कर सकें।

ध्येय (Mission)

वैदिक मौखिक परंपरा का संरक्षण व संवर्धन

चारों वेदों की विभिन्न शाखाओं के सस्वर पाठ, कंठस्थीकरण और श्रुति परंपरा को बाल्यावस्था से ही मूल स्वरूप में अक्षुण्ण बनाए रखना।

पुरातन और अधुनातन शिक्षा का समन्वय

वेदांग, दर्शन, धर्मशास्त्र और कर्मकाण्ड के साथ-साथ छात्रों को आधुनिक विज्ञान, गणित, आंग्ल भाषा (अंग्रेजी), कंप्यूटर अनुप्रयोग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में पारंगत बनाना।

कौशल विकास एवं स्वावलंबन

कौशल विकास एवं उद्यमिता (PMKVY/पौरोहित्य व प्रवचन प्रशिक्षण) के माध्यम से छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीविकोपार्जन के अवसर प्रदान करना।

वैदिक ज्ञान का डिजिटलीकरण व वैश्विक प्रसार

आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के सहयोग से दुर्लभ वैदिक पांडुलिपियों, ज्ञान-संपदा और सस्वर उच्चारण को डिजिटाइज कर वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना।

चरित्र निर्माण एवं नैतिक मूल्य

विद्यार्थियों में अनुशासन, ब्रह्मचर्य, सदाचार, योग-साधना, प्रकृति-पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास कर एक जिम्मेदार और संस्कारित नागरिक तैयार करना।

शारीरिक, मानसिक एवं समग्र विकास

छात्र-कल्याणकारी योजनाओं, संतुलित दिनचर्या, योग, खेल और आवासीय सुविधाओं के माध्यम से बटुकों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना।

विद्यालय प्रबंधन

स्वामी शरद पुरी जी

स्वामी शरद पुरी जी

उपाध्यक्ष

वैदिक ज्ञान एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय, समाज सेवा और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित आध्यात्मिक मार्गदर्शक।

डॉ. मनोज झुनझुनवाला

डॉ. मनोज झुनझुनवाला

सचिव

अनुभवी मीडिया एवं संचार विशेषज्ञ तथा दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त विद्वान।

ब्रजमोहन पाण्डेय

ब्रजमोहन पाण्डेय

प्राचार्य एवं आचार्य — सामवेद

श्री स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय के आदरणीय प्राचार्य एवं सामवेद के प्रख्यात विद्वान।

आचार्य

अवनीश कुमार पाण्डेय

अवनीश कुमार पाण्डेय

आचार्य — ऋग्वेद (घनपाठी)

ऋग्वेद (शाकल शाखा) के प्रतिष्ठित विद्वान एवं विशिष्ट घनपाठी, जो वैदिक सस्वर पाठ की परंपरा में पारंगत हैं।

जीवन उपाध्याय

जीवन उपाध्याय

आचार्य — शुक्ल यजुर्वेद

शुक्ल यजुर्वेद की पवित्र माध्यंदिन शाखा के सम्मानित विद्वान एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ।

गौरव चंद्र जोशी

गौरव चंद्र जोशी

आचार्य — शुक्ल यजुर्वेद

शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिन शाखा के प्रतिष्ठित विद्वान एवं समर्पित व्याख्याता।

खिमलाल न्यौपाने

खिमलाल न्यौपाने

आचार्य — अथर्ववेद

अथर्ववेद की प्रतिष्ठित शौनक शाखा के वरिष्ठ विद्वान एवं समर्पित व्याख्याता।

शिवानंद द्विवेदी

शिवानंद द्विवेदी

आचार्य — संस्कृत एवं व्याकरण

संस्कृत साहित्य एवं व्याकरण के कुशल विद्वान तथा वैदिक अध्ययन के भाषाई आधार के विशेषज्ञ।

कृष्ण कुमार मिश्र

कृष्ण कुमार मिश्र

आधुनिक विषय अध्यापक — अंग्रेजी

अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य के अनुभवी शिक्षक, जो वैदिक शिक्षा के साथ आधुनिक भाषाई कौशल का समन्वय करते हैं।

अंजनी कुमार सिंह

अंजनी कुमार सिंह

आधुनिक विषय अध्यापक — सामाजिक विज्ञान एवं कंप्यूटर

सामाजिक विज्ञान एवं कंप्यूटर शिक्षा के समर्पित शिक्षक, जो विद्यार्थियों के समग्र विकास में योगदान दे रहे हैं।

अवनि कुमार सिंह

अवनि कुमार सिंह

आधुनिक विषय अध्यापक — गणित एवं विज्ञान

गणित एवं विज्ञान के समर्पित शिक्षक, जो तार्किक क्षमता, वैज्ञानिक जिज्ञासा एवं विश्लेषणात्मक सोच विकसित करते हैं।